Friday, February 16, 2007

परिचय



डॉ० राष्ट्रबंधु

विविध लिंक

विविध लिंक

टाइगर हिल अष्टक

धक धक करने लगता है दिल
यह टाइगर हिल।

ऊँची चोटी तक बर्फ जमी
मुश्किल से मिलती है गर्मी
सीधे चढ़ना पड़ता इस पर
ऑक्सीजन की है बहुत कमी
दुर्गम में आ बैठे कातिल
यह टाइगर हिल।

पाकिस्तानी घुस पैठ हुई
गतिविधियों की गति तेज हुई
बंकर खोदे, रणक्षेत्र बना
कब्जे की बढ़ने लगी सुई
खतरे की घंटी ट्रिल ट्रिल
यह टाइगर हिल।

पाकिस्तानी मिल जाते थे
मजहब का जाल बिछाते थे
अपना उल्ल्ू सीधा करते
मछली की तरह फँसाते थे
कब तक हम सहते रह गाफिल
यह टाइगर हिल।

सहसा हिल गया हिमालय था
श्रीनगर लेह पथ में भय था
था शीतयुद्ध सहमे शहरी
बदला लेने का निश्चय था
यह द्रास, वटाला, है करगिल
यह टाइगर हिल।

भारत ने उनको ललकारा
जनता ने उनको धिक्कारा
लेने के देने पड़े उन्हें
सेना ने गिन-गिनकर मारा
पर्वत पर आग गई थी खिल
यह टाइगर हिल।

बर्बरता ने झुकना सीखा
निष्ठुरता ने रुकना सीखा
दुष्टों का दमन हुआ ऐसा
जैसे बिल में घुसना सीखा
बिलबिला गए बनते काबिल
यह टाइगर हिल।

हमने रक्खा है स्वाभिमान
बलिदान शौर्य का कीर्तिमान
यह वीर भोग्या वसुन्धरा
विज्ञान कृषक जय जय जवान
गाथा गायेगा विश्व निखिल
यह टाइगर हिल।

कृष्णा, काबेरी गंगा है
लहराता दिव्य तिरंगा है
पति, पुत्र पिता जो हैं शहीद
आँखें नम हैं, मन चंगा है
लहरों से कब विचलित साहिल
यह टाइगर हिल।
यह टाइगर हिल।।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

तालमेल

एक फूल पाँखुरी
फूल छोड़कर बढ़ी
वायु के बहाव में
पंक में गिरी झड़ी
हो गई विवश विलाप कर रही
रूप रंग गंध लिए मर रही।

एक बूँद नीर की
साथ छोड़कर बढ़ी
ताप में जली भुनी
भाप की बढ़ी चढ़ी
सूखने लगी अलग थलग हुई
बन गई प्रवाह में छुई मुई।

एकता के योग से
एक तारिका गिरी
अपशकुन हुआ कहीं
व्योम में लगी झिरी
तालमेल टूटना प्रलाप है
तालमेल बैठना प्रताप है।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

डॉ० राष्ट्रबंधु की दो बाल पुस्तकें


मेरे प्रिय राष्ट्रीय गीत

****








देशभक्ति के गीत

न्यारा उन्मेष

फूलों और फलों का देश
मीठा स्वाद सलोना वेश
प्यारा प्यारा भारत देश।

पर्वत रखते हैं ऊँचाई
रत्नाकर रखते गहराई
नदियों में बहता है अमृत
निर्झर ने ताकत दिखलाई
मेघ माँगते हैं आदेश
हरा भरा करते परिवेश
प्यारा प्यारा भारत देश।

काली पीली कुछ सिन्दूरी
कहीं भुरभुरी गोरी भूरी
मिट्टी कोहनूर रखती है
फसलों ने की आशा पूरी
अन्नपूर्णा माँ का वेश
दानशीलता का संदेश
प्यारा प्यारा भारत देश।

यहाँ शारदा गीत सुनाती
माँ रणचण्डी हमें जगाती
कृतियों ने इतिहास रचाया
हम गाते हैं गीत प्रभाती
गंध भरे इसके अवशेष
नित्य नया न्यारा उन्मेष
प्यारा प्यारा भारत देश।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

जय हो वीर जवानों की

वीर जवानों की जय हो
भारतमाता की जय हो

जो कि सत्य के लिए अड़े
जो कि न्याय के लिए लड़े
भारत माँ की रक्षा में
प्राणदान के लिए बढ़े।
सत्कर्मों का संचय हो
भारतमाता की जय हो।

सर्दी में जो पड़े रहे
मोर्चे पर जो अड़े रहे
नेफा में कश्मीर में
ले बन्दूकें खड़े रहे
पराधीनता का क्षय हो
भारतमाता की जय हो।

उनसे सबकी आजादी
उनसे सबकी खुशहाली
राणा शिवा सुभाष वे
युग उनसे गौरवशाली
परंपरा यह अक्षय हो
भारतमाता की जय हो।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

सिपाही से

चाचा नेहरू कहते थे तुम सब लोग सिपाही हो
मैं भी एक सिपाही हूँ तुम भी एक सिपाही हो।

मेरे पास न वरदी है,
यह मत सोचो धर दी है
मुझको नहीं जरूरत है,
मुझे न लगती सरदी है।
कहीं भूल या चूक हो,
तुम रखते बन्दूक हो
लाठी मेरे पास है,
दुश्मन सिर दो टूक हो
सैबर जेट उड़ाऊँगा,
अपने नैट उड़ाऊँगा
सव लाख को मारकर,
गोविंद सिंह कहाऊँगा।
मुक्तिवाहिनी पर अपनी, तुम सब लोग गवाही हो
मैं भी एक सिपाही हूँ तुम भी एक सिपाही हो।

केसरिया बाना पहने
आया विजय बसंत है
दुश्मन ठण्डे पड़ गए
यह अनन्त विजयन्त है
तुमको प्यारा देश है
मुझको तो तुम प्यारे हो
नहीं अकेले तुम कहीं
जय जवान के नारे हो
धरती धन के लिए नहीं
सच्चाई पर मरता हूँ
दुखी गरीब जहाँ भी हैं
सबकी रक्षा करता हूँ।
मेरा नाम मुजीब है, उनके लिए तबाही हो
मैं भी एक सिपाही हूँ तुम भी एक सिपाही हो।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

धरती को प्रणाम मेरा

कण कण को प्रणाम मेरा
क्षण क्षण को प्रणाम मेरा
प्रतिभा को प्रणाम मेरा
धरती को प्रणाम मेरा।

चित्रकूट, वृन्दावन, केरल
सोमनाथ उज्जयिनी धाम
रोमेश्वर, नवद्वीप, अमृतसर
कपिवस्तु साँची अभिराम।
श्रमण बेल गोला, अजमेरी
आस्था को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

जहाँ गुफाएँ और सुरंगें
कहती हैं श्रम की महिमा
खजुराहो, कोणार्क, अजंता
जड़ को देते हैं गरिमा।
चेतन शिल्पकार अनजाने
प्रतिभा को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

मिट्टी के नीचे चट्टानें
जहाँ संगमरमर शैशव
बंजर धरती में भी धन है,
सतत् साधना से वैभव
प्रासादों में पाषाणों की
शोभा को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

वर्षा सब ऋतुओं में रहती
गढ़ती है मनचाहा रूप
हरियाली का फल फसलें हैं
जिनका रूपक भव्य अनूप।
सृजन प्ररूप पानी पर निर्भर
कृषकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

छोटे पर्वत बड़े हो गए
बूढ़े कमर झुकाए हैं
उनके ऊपर पशु चलते हैं
पक्षी पर फैलाए हैं
विंध्याचल सहयाद्रि हिमालय
श्रमिकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

नैमिष, उत्पल, दण्डक, सुन्दर
वन अंचल केवल हैं शेष
आग और पानी रखते हैं
खनिज खनन देते अवशेष।
बैलाडीला, झारखण्ड के
श्रमिकों को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।

कुरुक्षेत्र, हल्दीघाटी के,
कण कण में इतिहास सना
मैदानी भागों में जन जन
के कारण विस्तार बना।
कच्छ, पोखरन हरिकोटा
वैज्ञानिक को प्रणाम मेरा।
कण कण ......।।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

महिमा

दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की
श्रद्धा मनु ने परिवारों की, छवि मर्यादा पेश की।

अंधकार में रवि-गति बनकर
प्रगति अनोखी चली अकेली
लोग कंदराओं में जब थे,
थी ईंटों की यहाँ हवेली।
यज्ञ केन्द्र में विविध कलाएँ साक्षी हैं परिवेश की,
दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की।

हमने कृषि उन्नति लाने को
नदियों का था जाल बिछाया
हमने तटबंधों पर अनगिन
सुविधाओं का साज सजाया
ये नदियाँ हैं संस्कृति रक्षक अलग अलग गणवेश की,
दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की।

जिओ और जीने दो सबको
इसने जीवन लक्ष्य बनाया
अभिलेखों में चिह्न सुरक्षित
परहित करना था सिखलाया
गुण गरिमा को और बढ़ाएँ, यह महिमा संदेश की,
दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

साधना

तुम चलो देश रुकता नहीं
मत झुको देश झुकता नहीं
कुछ करो मान सम्मान हो
कुछ करो दूर व्यवधान हो
गिड़गिड़ाना नहीं जिन्दगी
ध्यान रखना न अपमान हो।

मान अभिमान से तुम जिओ
घी उधारी न लेकर पिओ
बेंचकर मान, माँगो नहीं
कर्ज के वस्त्र टाँगो नहीं
कायरों के गले अर्गला
त्याग साहस की है शृंखला।

तुम चलो देश आगे बढ़े
ध्यान दो देश ऊपर चढ़े
वीरता से कसो तुम कमर
तो परिश्रम का होगा असर
देश कुर्बानियों से बना
त्याग का नाम है साधना।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

गाँव

यूक्लिप्टस की जगह नीम की छाँव हो
सोच रहा हूँ स्वयं शहर में गाँव हो।

जैसे पानी घुस जाता है गाँव में
शहर जबरिया घुस जाता है गाँव में।
पंचतत्व बिक गए भैंस है पानी में,
सज्जनता जीवित है कथा-कहानी में
नहीं काँइए कौवे जी की काँव हो
सोच रहा हूँ स्वयं शहर में गाँव हो।

शहर बदल देता है नक्शा गाँव का
धूमधड़ाका है ाकुनी के दाँव का
ऊँची ऊँची दीवारों का बड़ा शहर
बहुत दिखावा मगरमच्छ ढा रहा कहर
लंका में निश्छल अंगद का पाँव हो
सोच रहा हूँ स्वयं शहर में गाँव हो।

साँसें लेना बहुत कठिन है धुआँ घुसा
बिना बुलाए अतिथि शोर बस गया ठुसा
बैलों की घंटियाँ बजें ट्रैक्टर छोड़ें
कम्प्यूटर को सोच समझ कर ही जोड़ें
सबका सुख दुख एक बने वह ठाँव हो
सोच रहा हूँ स्वयं शहर में गाँव हो।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

chitra

हम बच्चे प्यारे हैं

आकाश हमारा है, हमसे उजियारे हैं
तारों जैसे चमचम, आँखों के तारे हैं
हम बच्चे प्यारे हैं।

सौतेले रिस्तों को ध्रुव ने जितना जाना
प्रहलाद पिता पीड़ित ने भोगा जुरमाना
हम वंचित सारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

लवकुश सीता माँ के, गायक बंजारे हैं
तुलसी के चौरे के, हम दीपक न्यारे हैं
हम भाग्य तुम्हारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

दुनिया छोटी लगती, दुनियादारी ठगती
एकलव्य हमारा है, संतोष सहारा है
कर्तव्य हमारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

अधिकार तुम्हारे हैं, तानों के मारे हैं
बरगद की छाया में, अपनों से हारे हैं
हम स्वयं सहारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

हम अपना श्रम देकर, सभ्यता सँवारे हैं

सबकी नजरों से हम गए उतारे हैं
मुस्कान सँवारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

हम वोट नहीं देते, हम नोट नहीं लेते
बटते कब पक्षों में, यक्षों या कक्षा में
आवरण उघारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।

बनकर जुलूस लम्बा, छोटापन धारे हैं
जो जीत चुनाव गए, हम उनके मारे हैं
कब लगे किनारे हैं,
हम बच्चे प्यारे हैं।
***
-डा० राष्ट्रबंधु

बच्चे हिन्दुस्तान के

बच्चे हिन्दुस्तान के
चलते सीना तान के
तानसेन की तरह गा रहे
नया तराना शान से।

हम किरणों जैसा चमकाते
कण कण के इतिहास को
हम विलास को छोड़ मोड़ते
वैभवपूर्ण विलास को।
हमने अपने रथ के घोड़े
रक्खे हरदम तान के
भाग्य बनाते अपने सबके
बंजर रेगिस्तान के।
बच्चे हिन्दुस्तान के....।।

शीत चाँदनी जैसे हम हैं
पूरएामासी लक्ष है
नहीं अमावस्या में अटके
मंजिल दूर समक्ष है।
गीता गायन करते रहते
कर्म प्रमुखता मान के।
बच्चे हिन्दुस्तान के .....।।
***
-डा० राष्ट्रबंधु

गौरव गान

यह धरती बलिदान की
जय हो हिन्दुस्तान की।

जिन्हें नहीं चिन्ता थी अपने प्राणों की
चोटें सहीं तमंचों तीर कृपाणों की
थाती है अहसान की
जय हो हिन्दुस्तान की!

चिन्ता केवल देशमान रख लेने की
मुँह की हार शत्रुओं को दे देने की
गाथाएँ सम्मान की
जय हो हिन्दुस्तान की!

गिरा जहाँ है खून वहीं काबा-काशी
मातृभूमि जिनके जीवन से गरीयशी
मर्यादा इंसान की
जय हो हिन्दुस्तान की!

पूजे जाते चित्र उन्हीं के घर-घर में
गाये जाते गीत हृदय के मंदिर में
ध्यान रखेंगे आन की
जय हो हिन्दुस्तान की!
***
-डा० राष्ट्रबंधु

प्यारा प्यार भारत देश

प्यारा प्यारा देश
मीठा स्वाद सलोना वेश
प्यारा प्यार भारत देश।

पर्वत रखते हैं ऊँचाई
रत्नाकर रखते गहराई
नदियों में बहता है अमृत
निर्झर ने ताकत दिखलाई।
मेघ माँगते हैं आदेश
हरा भरा करते परिवेश
प्यारा प्यारा भारत देश!

काली पीली कुछ सिन्दूरी
कहीं भुरभुरी गोरी भूरी
मिट्टी कोहिनूर रखती है
फसलों ने की आशा पूरी
अन्नपूर्णा माँ का वेश
दानशीलता का संदेश
प्यारा प्यारा भारत देश।

यहाँ शारदा गीत सुनाती
माँ रणचण्डी हमें जगाती
कुटियों ने इतिहास रचाया
हम गाते हैं गीत प्रभावी
गंध भरे इसके अवशेष
नित्य नया न्यारा उन्मेष
प्यारा प्यारा भारत देश।
***
-डा० राष्ट्रबंधु

माँगने से क्या पायेंगे !

हाथों में तकदीर हमारी, हाथ बढ़ायेंगे
भाग्य बनाने से स्वदेश का, हम सुख पायेंगे
माँगने से क्या पायेंगे !

हम भारत की नन्हीं कलियाँ
महकायेंगे रस्ते गलियाँ
भारत क्या है? सारी जनता
बिना प्रगति गति चित्र अजन्ता
गायेंगे हम राग भैरवी अलख जगायेंगे
स्वर्ग कल्पना से उतार कर भू पर लायेंगे।
अचम्भा कर दिखलायेंगे
माँगने से क्या पायेंगे ?

आजादी क्या, पकी फसल है
बढ़ने वाली नदी नसल है
समता क्या है भाई-चारा
मजबूती का ईंटा-गारा
भेदभाव की हर बाधा को दूर भगायेंगे
पाने को सहयोग सभी का हम अपनायेंगे।
फूट से हम मिट जायेंगे।
माँगने से क्या पायेंगे?

हम भविष्य को सींच रहे हैं
हम विकास-रथ खींच रहे हैं
हमने गीत रचे हलचल के
भावी कलाकार हम कल के
राष्ट्रीयता का मनचाहा रूप बनोयेंगे
अपने को न्योछावर करके सब सुख पायेंगे।
त्याग का मान बढ़ायेंगे
माँगने से क्या पायेंगे?
***
-डा० राष्ट्रबंधु

Saturday, November 11, 2006

विविध लिंक-3

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विविध लिंक-2

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