Friday, February 16, 2007

साधना

तुम चलो देश रुकता नहीं
मत झुको देश झुकता नहीं
कुछ करो मान सम्मान हो
कुछ करो दूर व्यवधान हो
गिड़गिड़ाना नहीं जिन्दगी
ध्यान रखना न अपमान हो।

मान अभिमान से तुम जिओ
घी उधारी न लेकर पिओ
बेंचकर मान, माँगो नहीं
कर्ज के वस्त्र टाँगो नहीं
कायरों के गले अर्गला
त्याग साहस की है शृंखला।

तुम चलो देश आगे बढ़े
ध्यान दो देश ऊपर चढ़े
वीरता से कसो तुम कमर
तो परिश्रम का होगा असर
देश कुर्बानियों से बना
त्याग का नाम है साधना।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

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