Friday, February 16, 2007

सिपाही से

चाचा नेहरू कहते थे तुम सब लोग सिपाही हो
मैं भी एक सिपाही हूँ तुम भी एक सिपाही हो।

मेरे पास न वरदी है,
यह मत सोचो धर दी है
मुझको नहीं जरूरत है,
मुझे न लगती सरदी है।
कहीं भूल या चूक हो,
तुम रखते बन्दूक हो
लाठी मेरे पास है,
दुश्मन सिर दो टूक हो
सैबर जेट उड़ाऊँगा,
अपने नैट उड़ाऊँगा
सव लाख को मारकर,
गोविंद सिंह कहाऊँगा।
मुक्तिवाहिनी पर अपनी, तुम सब लोग गवाही हो
मैं भी एक सिपाही हूँ तुम भी एक सिपाही हो।

केसरिया बाना पहने
आया विजय बसंत है
दुश्मन ठण्डे पड़ गए
यह अनन्त विजयन्त है
तुमको प्यारा देश है
मुझको तो तुम प्यारे हो
नहीं अकेले तुम कहीं
जय जवान के नारे हो
धरती धन के लिए नहीं
सच्चाई पर मरता हूँ
दुखी गरीब जहाँ भी हैं
सबकी रक्षा करता हूँ।
मेरा नाम मुजीब है, उनके लिए तबाही हो
मैं भी एक सिपाही हूँ तुम भी एक सिपाही हो।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

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