Friday, February 16, 2007

गौरव गान

यह धरती बलिदान की
जय हो हिन्दुस्तान की।

जिन्हें नहीं चिन्ता थी अपने प्राणों की
चोटें सहीं तमंचों तीर कृपाणों की
थाती है अहसान की
जय हो हिन्दुस्तान की!

चिन्ता केवल देशमान रख लेने की
मुँह की हार शत्रुओं को दे देने की
गाथाएँ सम्मान की
जय हो हिन्दुस्तान की!

गिरा जहाँ है खून वहीं काबा-काशी
मातृभूमि जिनके जीवन से गरीयशी
मर्यादा इंसान की
जय हो हिन्दुस्तान की!

पूजे जाते चित्र उन्हीं के घर-घर में
गाये जाते गीत हृदय के मंदिर में
ध्यान रखेंगे आन की
जय हो हिन्दुस्तान की!
***
-डा० राष्ट्रबंधु

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