Friday, February 16, 2007

बच्चे हिन्दुस्तान के

बच्चे हिन्दुस्तान के
चलते सीना तान के
तानसेन की तरह गा रहे
नया तराना शान से।

हम किरणों जैसा चमकाते
कण कण के इतिहास को
हम विलास को छोड़ मोड़ते
वैभवपूर्ण विलास को।
हमने अपने रथ के घोड़े
रक्खे हरदम तान के
भाग्य बनाते अपने सबके
बंजर रेगिस्तान के।
बच्चे हिन्दुस्तान के....।।

शीत चाँदनी जैसे हम हैं
पूरएामासी लक्ष है
नहीं अमावस्या में अटके
मंजिल दूर समक्ष है।
गीता गायन करते रहते
कर्म प्रमुखता मान के।
बच्चे हिन्दुस्तान के .....।।
***
-डा० राष्ट्रबंधु

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