Friday, February 16, 2007

महिमा

दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की
श्रद्धा मनु ने परिवारों की, छवि मर्यादा पेश की।

अंधकार में रवि-गति बनकर
प्रगति अनोखी चली अकेली
लोग कंदराओं में जब थे,
थी ईंटों की यहाँ हवेली।
यज्ञ केन्द्र में विविध कलाएँ साक्षी हैं परिवेश की,
दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की।

हमने कृषि उन्नति लाने को
नदियों का था जाल बिछाया
हमने तटबंधों पर अनगिन
सुविधाओं का साज सजाया
ये नदियाँ हैं संस्कृति रक्षक अलग अलग गणवेश की,
दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की।

जिओ और जीने दो सबको
इसने जीवन लक्ष्य बनाया
अभिलेखों में चिह्न सुरक्षित
परहित करना था सिखलाया
गुण गरिमा को और बढ़ाएँ, यह महिमा संदेश की,
दस हजार सालों से ज्यादा उमर हमारे देश की।
***
-डॉ० राष्ट्रबंधु

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